जागेश्वर न्यूज नेटवर्क

बरेली। भाजपा नेता की बेटी और चार दिन की नवजात नातिन की संदिग्ध डेंगू बुखार से मौत हो गई। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने पर मां-बेटी को आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। वहां जांच में प्लेटलेट्स काफी कम आई थी। जिले में बुखार से बीते एक सप्ताह में 10 लोगों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में बुधवार को 13 लोग डेंगू पॉजिटिव मिले हैं।

भाजपा नेता उदय कटिहा की बेटी प्रेरणा का परिवार कुर्मांचल नगर में रहता है। उनके पति प्रतीक पांडेय आर्मी में अफसर हैं। प्रेरणा गर्भवती थी और बीते 13 अक्तूबर को रामपुर गार्डन स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां 15 अक्तूबर को प्रेरणा ने बेटी को जन्म दिया था। उसी समय से प्रेरणा और नवजात बेटी की तबियत खराब थी। जांच में प्लेटलेट्स सिर्फ 11 हजार थीं। परिजनों ने दोनों को आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया जहां बुधवार को मां-बेटी की मौत हो गई। मां-बेटी की मौत से घर में मातम पसरा हुआ है।

जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 484 पहुंच गई है। यह बीते 25 साल में डेंगू मरीजों की दूसरी सबसे अधिक संख्या है। 2021 में सबसे अधिक 595 डेंगू संक्रमित मिले थे। 

बीते साल का रिकार्ड टूटा

डेंगू बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है और बुधवार को मरीजों की संख्या ने बीते साल का रिकार्ड तोड़ दिया। स्वास्थ्य विभाग की जांच में बुधवार को डेंगू बुखार के 13 नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही मरीजों की संख्या बढ़कर 484 पहुंच गई है। यह बीते 25 साल में डेंगू मरीजों की दूसरी सबसे अधिक संख्या है। वर्ष 2021 में सबसे अधिक 595 डेंगू संक्रमित मिले थे।

11एमबीबीएस डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, लड़खड़ाई व्यवस्था

डेंगू बुखार के बढ़ते प्रकोप के बीच इलाज का संकट गहरा गया है। स्वास्थ्य विभाग में 11 एमबीबीएस डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों के इस्तीफे से अस्पताल खाली हो गए हैं और वहां मरीजों को जांच, इलाज की सुविधा मिलना फिलहाल मुश्किल हो गया है। कम से कम एक माह तक यहां डॉक्टरों की तैनाती होना कठिन है।

शहर के अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की संविदा पर तैनाती की गई है। शहर में 23 पीएचसी और 34 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। तीन माह पहले ही यहां डॉक्टरों की तैनाती की प्रक्रिया पूरी की गई थी। डेंगू बुखार के बढ़ते हमले के चलते शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की खासी भीड़ जुट रही थी। अब 11 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग से इस्तीफा दे दिया है। इसमें कई डॉक्टरों का पीजी में चयन हो गया है।

एक साथ 11 डॉक्टरों के इस्तीफा देने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। रोटेशन प्रणाली के तहत उपलब्ध डॉक्टरों की ड्यूटी लगाकर स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन का प्रयास किया जा रहा है।

इन डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा

इस्तीफा देने वालों में डॉ. मोनी कश्यप की अनुपमनगर और नेकपुर गौटिया, डॉ. काजिम अब्बास की फरीदापुर चौधरी, डॉ. अमन मौर्य की नगरिया परीक्षित, डॉ. सैजनी यादव की बंशीनगला और नेकपुर, डॉ. विजेंद्र सिंह की बानखाना और गंगापुरम, डॉ. सुचेत यादव की मौलानगर, डॉ. हीराकमर की बहेड़ी यूपीएचसी, डॉ. सुनीधि गुप्ता की जाटवपुरा, डॉ. निखिल कुमार की संतनगर, डॉ. यू खान की हरुनगला और डॉ. प्रखर सक्सेना की विश्वनाथपुरम स्वास्थ्य केंद्र पर तैनाती थी।

इन क्षेत्रों में है डेंगू का अधिक प्रकोप

बानखाना, मौलानगर, जाटवपुरा, गंगापुरम, सुर्खा, बहेड़ी कस्बा शामिल है जहां डेंगू बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। अब डॉक्टरों की भर्ती वाक-इन-इंटरव्यू के जरिये करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। लेकिन इसमें कम से कम एक माह का समय लग सकता है।