जागेश्वर न्यूज नेटवर्क 

बरेली। शीत लहर और सर्द हवाओं के चलते अभिभावकों की जिला प्रशासन से उम्मीद थी कि अभी कुछ एक दो दिन स्कूलों में अवकाश घोषित किया जाएगा। वहीं शिक्षक संगठनों द्वारा भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से इस बाबत मांग की गई थी। लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला प्रशासन ने सर्दियों की छुट्टी बढ़ाना उचित नहीं समझा जिसके कारण घने कोहरे व सर्द बर्फीली हवाओं के बीच नौनिहालों को स्कूल जाना पड़ा। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में सर्दी के बाद खुले स्कूलों में कम छात्र संख्या देखने को मिली। वहीं बात अध्यापकों की करें तो अध्यापक भी विद्यालय में कम दिखें क्योंकि बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकांश सहायक अध्यापक शिक्षामित्र अनुदेशक बीएलओ ड्यूटी में लगे हुए हैं। 


वहीं कुछ प्रधानाध्यापक भी सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन मंगलवार को 10 बजे से 4 बजे के बीच होना था और यह कार्य निरंतर 7 दिन तक चलने वाला है। इसके लिए तहसीलदार सदर ने निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के क्रम में आदेश जारी किया है जिस कारण अधिकांश शिक्षक जो बीएलओ या सुपरवाइजर हैं वह अपने मतदेय स्थल पर पहुंचे थे। जिनके कारण कई विद्यालय के ताले तक नही खुले। जानकारी के अनुसार परिषदीय विद्यालयों में मंगलवाल को शीतकालीन अवकाश और शासन प्रशासन के ठंड के कारण बढाये हुए अवकाश के बाद जब एक बार फिर से विद्यालय खुले तो बच्चे ठंड में ठिठुरते हुए नजर आए। हालाॅकिं स्कूलों में ज्यादा संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित नही हुए लेकिन जो भी बच्चे स्कूल पहुंचे वे ठंड के कारण कक्षाओं में दुबके नजर आये। बच्चों की इस स्थिति को देख कहीं कहीं विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यालय में बच्चों के लिए आग जलाकर अपनी निगरानी में तापाने का कार्य किया। आग तापते समय बच्चों को मौखिक पठन पाठन का कार्य कराया गया। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण जिला प्रशासन की तरफ से शीतकालीन अवकाश बढ़ा दिए गए थे। और मंगलवार से विद्यालय खोले जाने के आदेश दिए गये थे। शासन ने विद्यालयों का समय 10 बजे से तीन बजे तक निर्धारित किया है। मंगलवार को जब विद्यालय खुले तो विद्यालयों में बच्चे ठिठुरते नजर आये। सीबीगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बहजुईया जागीर की प्रधानाध्यापिका शशिवाला जौहरी ने कम उपस्थिति के कारण बच्चों के ग्रुप बनाये और अलाव की व्यवस्था की। अलाव से बच्चों को कुछ सुकून मिला, वहीं आलव के चारों ओर बच्चों को मौखिक पठन-पाठन कराया गया।