जागेश्वर न्यूज संवाददाता
बरेली। दो साल के बच्चे का खतना करने के आरोप से घिरे एम. खान अस्पताल प्रबंधन का मौलाना तौकीर रजा के संगठन इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) ने बचाव किया है। आईएमसी प्रवक्ता डॉक्टर नफीस खान ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि डॉक्टर एम. खान द्वारा पेशाब की परेशानी पर बच्चे के प्राइवेट पार्ट से खाल हटाने का ऑपरेशन किए जाने के बाद कथित हिंदूवादी संगठनों द्वारा जो आरोप लगाया जा रहा है, वो सरासर गलत है।
आईएमसी प्रवक्ता ने कहा कि पेशाब संबंधी परेशानी या स्वेच्छा से मूत्रमार्ग की खाल हटा देने से (खतना करा लेने ) से कोई मुसलमान नहीं हो जाता। पेशाब संबंधी कई रोगों में मूत्रमार्ग से खाल हटाना जरूरी होता है। इस तरह के ऑपरेशन अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा किए जाते रहे हैं, जिसके संबंध में मरीज को पूर्व में जानकारी दी जाती है। किसी भी ऑपरेशन से पूर्व इस संबंध में मरीज के परिजनों से लिखित में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर एम. खान की ओर से भी बच्चे के परिजनों को इस संबंध में अवगत कराकर सहमति पत्र पर स्वीकृति ली गई। जिसके बाद ऑपरेशन किया गया था। कुछ हिंदूवादी संगठन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाकर समाज में नफरत फैला रहे हैं। ऐसे व्यक्तियों और संगठनों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। आईएमसी नेता ने कहा कि डॉक्टर की आस्था किसी धर्म में हो, वह उसका व्यक्तिगत मसला है।
आपको बता दें कि संजयनगर निवासी हरिमोहन यादव बेटे का इलाज कराने शुक्रवार सुबह एम. खान अस्पताल पहुंचे थे। हरिमोहन ने बताया कि उनका दो साल का बेटा बोल नहीं पाता है। इसलिए उसका तालू का ऑपरेशन कराने आए थे। डॉ. जावेद खान व स्टाफ बच्चे को ऑपरेशन थिएटर में ले गए। ऑपरेशन के बाद बच्चा वार्ड में लाया गया तो उन्हें पता लगा कि बेटे के प्राइवेट पार्ट से खाल हटाई गई है। उन्होंने खतना करने का आरोप लगाया। जानकारी पर हिंदू जागरण मंच के लोगों ने हंगामा किया था। अस्पताल प्रबंधन पर खतना कर धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया था।

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