- सीएचसी माधोटांडा का मामला

- शहर की गणेश ट्रेडिंग कंपनी ने किया था दान

पूरनपुर। कोरोना काल के दौरान शहर के एक समाजसेवी द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माधोटांडा में दान किए गए जेनरेटर को वापस ले लिया गया है। जेनरेटर वापस लेने के लिए दानदाता समाजसेवी ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लीगल नोटिस भी भेजा, जिसके बाद सीएमओ ने दान किया हुआ जेनरेटर वापस ले जाने के बाबत लिखित दिशानिर्देश दिए। शुक्रवार को समाजसेवी ने कुछ लोगों को सीएचसी माधोटांडा भेजकर दान किया हुआ जेनरेटर वापस मंगा लिया।

दरअसल कोरोना की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने सीआरएस फंड से संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई थी। इसमें व्यापारियों, मिल संचालकों, फर्म मालिकों आदि का सहयोग लेकर आक्सीजन सिलिंडर, आक्सीजन कंसेंट्रेटर, जेनरेटर व कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आवश्यक संसाधन दान लिए गए थे। शहर की गणेश ट्रेडिंग कंपनी के संचालक अनूप अग्रवाल ने सीएचसी माधोटांडा में एक जेनरेटर दान किया था। समाजसेवी द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस में कहा गया कि तत्कालीन जिलाधिकारी पुलकित खरे ने सीएचसी माधोटांडा पर बिजली व जेनरेटर की व्यवस्था न होने से रोगियों को हो रही असुविधा के बारे में जानकारी दी थी।

लीगल नोटिस में कहा गया कि महामारी खत्म होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार जेनरेटर वापस करने के बाबत मौखिक रूप से कहा गया लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। नोटिस का उत्तर देते हुए सीएमओ ने कहा कि विभाग को प्राप्त संपत्ति लिखित रूप में दर्ज की जाती है, इसका मौखिक रूप से कोई रिकार्ड नहीं होता है। जेनरेटर वापस दिए जाने के बाबत समाजसेवी के पास कोई पूर्व अनुबंध पत्र आदि नहीं है और न ही उनके द्वारा आज तक लिखित रूप में मांग की गई।

लीगल नोटिस भेजकर इस बात की जानकारी दी गई है जिसका जवाब देते हुए अपना जेनरेटर वापस ले जाने के दिशानिर्देश दिए गए हैं। विभाग के पास इस प्रकार की कोई मद नहीं है जिसके अंतर्गत जेनरेटर को वापस भेजने का खर्च वहन किया जा सके। नोटिस का जवाब मिलने के बाद समाजसेवी द्वारा सीएचसी माधोटांडा से स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में लिखित कार्रवाई पूर्ण कर जेनरेटर वापस ले जाया गया।